विचारों को सकारात्मक दिशा देने से जीवन में आएगा सुखद परिवर्तन
राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि जीवन में आने वाले विचारों और भावनाओं के बहाव को रोकने की कोशिश करने के बजाय उन्हें सही दिशा देना चाहिए। बहाव को रोकने से परेशानियां बढ़ती हैं, जबकि उसकी दिशा बदलने से सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।
जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि पानी, आग और हवा को रोकने की कोशिश करने के बजाय उनकी दिशा बदलना अधिक प्रभावी उपाय है। इसी प्रकार क्रोध को दबाने के बजाय उसकी दिशा सकारात्मक कार्यों की ओर मोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विचारों और भावनाओं में स्थायी बदलाव लाने का प्रयास होना चाहिए, केवल कुछ समय के लिए किया गया बदलाव पर्याप्त नहीं है।
श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि जीवन में आने वाले किसी भी बहाव को रोकने के बजाय उसका सामना करें या आवश्यकता हो तो रास्ता बदलकर उससे दूर हो जाएं। भावनाओं को दूसरे कामों में लगाकर टालने के बजाय उन्हें समझना और उनका सामना करना जरूरी है। मन को प्रसन्न रखने वाले कार्यों को अपनाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि हम दूसरों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, लेकिन जो कार्य हम कर रहे हैं उसके लिए अपने मन को भी धन्यवाद देना चाहिए। जब व्यक्ति खुश रहना सीख जाता है तो उसका मन स्वयं ही भावनाओं को सही दिशा देने लगता है और जीवन में सुखद बदलाव आने लगता है।

