रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। मंत्रालय वायुसेना के लिए अमेरिकी Mk-84 जनरल पर्पज बम की तर्ज पर 1000 किलो का देसी बम बनाने की तैयारी में है। इसके लिए EoI भी जारी कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए एमके-84 के समान 1000 किलोग्राम के हवाई बम के स्वदेशी डिजाइन और विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में भारत की ‘ आत्मनिर्भरता ‘ को बढ़ावा देना है।
वर्तमान में, एमके-84 श्रेणी के सामान्य प्रयोजन बम विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं से खरीदे जाते हैं और भारतीय वायु सेना में सेवा में हैं।
भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 1000 किलोग्राम के हवाई बम के स्वदेशी डिजाइन और विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस स्वदेशी एरियल बम के डिजाइन, डेवलपमेंट और उत्पादन के लिए Expression of Interest (EoI) जारी कर दी गई है। यह बम अमेरिकी Mk-84 जनरल पर्पज बम की तरह का होगा।
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना ‘मेक-II’ (इंडस्ट्री फंडेड) श्रेणी के तहत संचालित की जाएगी। इसके सफल परीक्षण के बाद ‘बाय (इंडियन-आईडीडीएम)’ श्रेणी के अंतर्गत 600 बमों की खरीद की जाएगी।
एक अधिकारी ने बताया कि परियोजना को दो चरणों में संरचित किया गया है। पहले चरण में छह प्रोटोटाइप (सक्रिय और निष्क्रिय) का डिजाइन और विकास शामिल है, जिसमें संबंधित टेल यूनिट और उपकरण भी शामिल हैं, जिसमें संबंधित टेल यूनिट और उपकरण भी शामिल हैं। दूसरा चरण खरीद का चरण है, जो योग्य विकास एजेंसियों को वाणिज्यिक प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी करने के साथ शुरू होगा। अधिकारियों का कहना है कि EoI जारी होने से लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर तक की समयसीमा लगभग 2.5 साल तय की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यह बम एक हाई कैलिबर नैचुरल फ्रैगमेंटेशन म्यूनिशन होगा, जिसमें बहुत ऊंचा ब्लास्ट इफेक्ट और पीक ओवर-प्रेशर (PoP) उत्पन्न करने की क्षमता होगी। इससे दुश्मन के ठिकानों पर बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकेगा। IAF वर्तमान में Mk-84 श्रेणी के बम विदेशी OEMs से खरीदती है। नई परियोजना के बाद भारत इन बमों के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
नए एरियल बम को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यह भारतीय वायुसेना द्वारा संचालित रूसी मूल के लड़ाकू विमानों (जैसे Su-30MKI, MiG-29) और पश्चिमी मूल के विमानों (Mirage-2000, Rafale) पर फिट किया जा सके।


