दंतेवाड़ा। बस्तर में वन्यजीवों के अवैध शिकार का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। दंतेवाड़ा जिले के गीदम रेंज अंतर्गत गुमलनार इलाके में वन विभाग की टीम ने तेंदुए की खाल के साथ पांच शिकारियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपितों ने तेंदुए को पहले फंदे में फंसाया और फिर जिंदा हालत में कुल्हाड़ी से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद खाल निकालकर मांस को खा गए और खाल बेचने की तैयारी में थे।
वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी
वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि क्षेत्र में तेंदुए का शिकार कर उसकी खाल बेचने की कोशिश की जा रही है। इस पर डीएफओ रंगनाधा रामाकृष्णा वाय के निर्देश पर बचेली रेंजर डॉ. प्रीतेश पांडेय के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर आरोपितों को धर दबोचा। आरोपितों के पास से तेंदुए की खाल समेत अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं। वन विभाग ने सभी के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की पूछताछ जारी है।
बस्तर में बढ़ते शिकार के मामले
पिछले दो वर्षों में बस्तर संभाग में वन्यजीव शिकार के कई मामले सामने आए हैं। वर्ष 2025 में कांकेर और कोंडागांव में हिरण और जंगली सूअर के शिकार के मामले दर्ज हुए। सुकमा और बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में भी फंदे लगाकर शिकार करने की घटनाएं सामने आईं।
एक माह पहले ही दंतेवाड़ा में बाघ की खा के साथ आरोपित पकड़े गए थे।पिछले दो साल में चार से अधिक मामले बाघ के शिकार के भी सामने आ चुके हैं। वन विभाग के अनुसार, जंगलों में अवैध शिकार के लिए तार के फंदे और देसी हथियारों का इस्तेमाल बढ़ा है।
चुनौती बनी निगरानी
बस्तर के घने जंगल और दूरस्थ इलाके वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सीमित स्टाफ और संसाधनों के बीच शिकारियों पर नजर रखना मुश्किल होता है। हालांकि हाल के समय में विभाग द्वारा मुखबिर तंत्र मजबूत करने और संयुक्त अभियान चलाने से कई मामलों में सफलता मिली है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के शिकार को लेकर सख्त कार्रवाई की जा रही है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। लगातार अभियान चलाकर ऐसे गिरोहों पर शिकंजा कसा जा रहा है।


