
लाइफस्टाइल डेस्क। गर्मियों का मौसम आते ही आम का स्वाद हर किसी को लुभाने लगता है. आजकल बाजार में जल्दी पकाने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल आम बात हो गई है, लेकिन पुराने समय में लोग पूरी तरह प्राकृतिक तरीकों से आम पकाते थे. इन देसी तरीकों से न सिर्फ आम सुरक्षित रहते थे, बल्कि उनका स्वाद भी कहीं ज्यादा मीठा और रसदार होता था. आइए जानते हैं ऐसे ही पारंपरिक तरीके, जो आज भी अपनाए जा सकते हैं. चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

भूसे (पराली) में पकाना ग्रामीण इलाकों में आम पकाने का सबसे लोकप्रिय तरीका था उन्हें सूखे भूसे या पराली में दबाकर रखना. आम को ढेर में रखकर ऊपर से भूसा डाल दिया जाता था, जिससे अंदर हल्की गर्मी बनती थी. यह प्राकृतिक गर्माहट आम को धीरे-धीरे पकाती थी, जिससे उसका स्वाद और सुगंध बरकरार रहती थी.
मिट्टी के बर्तन में स्टोर करना पुराने समय में लोग कच्चे आम को मिट्टी के घड़े या हांडी में रखकर ऊपर से ढक देते थे. मिट्टी का बर्तन तापमान को संतुलित बनाए रखता है, जिससे आम बिना किसी नुकसान के धीरे-धीरे पकते हैं. यह तरीका खासतौर पर घरों में इस्तेमाल किया जाता था.
अनाज के बीच रखना एक और पारंपरिक तरीका था आम को गेहूं या चावल के ढेर में दबाकर रखना. अनाज के बीच रखने से आम को पर्याप्त गर्मी और नमी मिलती है, जिससे वे समान रूप से पकते हैं. यह तरीका आज भी कई गांवों में प्रचलित है.
कपड़े में लपेटकर रखना कुछ लोग आम को सूती कपड़े में लपेटकर किसी गर्म जगह पर रख देते थे. कपड़ा आम की नमी को बनाए रखता है और बाहर की हवा से बचाता है. इससे आम धीरे-धीरे पकते हैं और उनका स्वाद प्राकृतिक बना रहता है.
पेड़ की पत्तियों के साथ रखना आम को पेड़ की सूखी पत्तियों के साथ बंद जगह में रखने से भी वे जल्दी पकते हैं. पत्तियां हल्की गर्मी और प्राकृतिक गैस छोड़ती हैं, जो पकने की प्रक्रिया को तेज करती हैं. यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित माना जाता है.
क्यों बेहतर हैं ये देसी तरीके? इन पारंपरिक तरीकों में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. आजकल इस्तेमाल होने वाला कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायन शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं. वहीं, प्राकृतिक तरीके आम के असली स्वाद, रंग और खुशबू को बनाए रखते हैं.

