Agni-1 Missile Successful Launch: भारत ने स्वदेशी अग्नि-1 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। अग्नि-1 शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया। परमाणु व पारंपरिक दोनों वॉरहेड ले जाने में सक्षम यह मिसाइल 700-1200 किमी तक हमला कर सकता है। इसकी जद में पूरा पाकिस्तान आता है। यह परीक्षण पाकिस्तान को करारा जवाब है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में फतह मिसाइलों का टेस्ट किया है।
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘अग्नि-1’ (Agni-1) बैलिस्टिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण शाम ठीक 6:30 बजे एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से किया गया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “इस सफल परीक्षण के साथ, भारत ने एक बार फिर एक ही मिसाइल सिस्टम का उपयोग करके कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इस मिसाइल को DRDO की प्रयोगशालाओं ने देश भर के उद्योगों के सहयोग से विकसित किया है। इस परीक्षण को DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और भारतीय सेना के जवानों ने देखा। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपना तय रास्ता पूरा किया और लक्ष्य को सटीक रूप से भेदा। मिसाइल की सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल विशेषताओं की जांच की गई और वे पूरी तरह सही पाई गईं। इस सफल परीक्षण से भारत की रणनीतिक तैयारियों और अग्नि-1 मिसाइल की विश्वसनीयता की एक बार फिर पुष्टि हुई है।
अग्नि-1 मिसाइल क्या है
यह मिसाइल भारत की क्रेडिबल मिनिमम डिटेरेंस नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2004 में भारतीय सेना में शामिल की गई थी।अग्नि-1 की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे सड़क से आसानी से लॉन्च किया जा सकता है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर इसे तेजी से किसी भी जगह से दागा जा सकता है। ठोस ईंधन होने के कारण इसे लॉन्च करने में कम समय लगता है। ॉ
अग्नि-1′ मिसाइल की मारक क्षमता और खासियत
- सटीक निशाना: यह मिसाइल 700 किलोमीटर से लेकर 1200 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को पूरी सटीकता से ध्वस्त कर सकती है।
- वजन और लंबाई: इस मिसाइल की कुल लंबाई 12 मीटर है और इसका वजन करीब 12 टन है।
- पेलोड क्षमता: यह अपने साथ 1,000 किलोग्राम (1 टन) तक के परमाणु या पारंपरिक विस्फोटक ले जा सकती है।
- ठोस ईंधन (Solid Propellant): मिसाइल में ठोस प्रणोदक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से इसे बेहद कम समय में तुरंत लॉन्च (त्वरित प्रक्षेपण) के लिए तैयार किया जा सकता है।


